Category Archives: श्रृंगार/प्रेम

सुनो तो

काली घनेरी बूँद से पूछो क्यों रो दिए इंसान हर तरफ मिला इंसान खो दिए । मंदिर हो या मस्जिद कहीं कलीसा सभी जगह वो तू ही था हर उस जगह, जिसको नज़र किये । ऐसा लगे क्यों तुझमे नहीं … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल, जीवन तरंग, दुःख, भक्ति | 6 Comments

“तो क्या हो ……………”

तेरे पहलू में सर छुपा ले तो क्या हो इस जहाँ को शमशान बना दे तो क्या हो जी नहीं सकते इक पल भी तुम बिन तुझे इस जहाँ से चुरा ले तो क्या हो दामन-ए-वक़्त में है तेरा मिलना वक़्त … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल, श्रृंगार/प्रेम | 3 Comments

काश…

मुहब्बत में जलाकर आज भी रखे दिये हमने कभी तू लौटकर देखे अँधेरा न मिले घर में॥ ख़ुशी मिलती है, तेरी शोहबतें हासिल नहीं मगर तेरी यादों के हाथो सौंप दी ये ज़िन्दगी हमने ॥ छुपा के रखे है हमने … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल, श्रृंगार/प्रेम | 8 Comments

कुछ बात करें…

आओ कुछ बात करें सुने सुनाएँ अपने तुम्हारे दिलों की चीखे चिल्लाएं महसूस करें साँसों की जुंबिश हाथों की थिरकन होठों की लरज़ और माथे की शिकन गएँ उन गीतों को जो हमारे थे कोसें उन लम्हों को जो हमारे … Continue reading

Share
Posted in श्रृंगार/प्रेम | 6 Comments

तन्हा राहें और तुम

उन्ही राहों पर हम तन्हा चले हैं कदम के निशाँ तेरे मेरे पड़े हैं ॥ वही रंग हैं और वही रूप भी है मगर पेड़ नज़रें झुकाए खड़े है ॥ बुलाया हमें उस गहरी नदी ने जिसके किनारे सूने बड़े है … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल, श्रृंगार/प्रेम | 13 Comments

तुम …

भुला दिए वो हमें यूँ किसी कसम की तरह हमारे दिल में समाएँ हैं जो बचपन की तरह॥ वही ख्याल वही गम वही है शोख समां ये राज़ तेरी मुहब्बत का है शबनम की तरह॥ लटें जो हिलती हुयी काँधों … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल, श्रृंगार/प्रेम | 12 Comments

तेरे नैन मेरे बैन …

तेरे नयनो की धवल शांति में डूबता तैरता मेरा मन कभी तिनके का सहारा कभी स्वयं जलधारा नयनो के सहारे हृदय की दहलीज़ पर दस्तक देता मेरा मन जाने कब से तेरी भावना के सागर में उफान के इंतज़ार में … Continue reading

Share
Posted in श्रृंगार/प्रेम | 14 Comments

प्यार: जवाब या सवाल…

अच्छा हुआ जो कोई जवाब ना दिया रुसवा जो हो मुहब्बत वो लम्हात ना दिया । कोई तो दाग लगता दमन में प्यार के इस डर से उस सवाल से मुंह ही चुरा लिया । कोई तो हूक होगी मेरे … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल | 10 Comments

तमन्ना…

जिसके लिए जलाए थे सितारे चराग से पूनम की उस चमक को बादल चुरा लिए । झूठे से दो पलों की शिकायत करें तो क्यों न तुम कभी खफा थे न हम बेवफा हुए । शर्मों हया की सुर्खियां खामोशियाँ … Continue reading

Share
Posted in ग़ज़ल | 8 Comments