Category Archives: ग़ज़ल

कोई गिला नहीं

कोई गिला नहीं कोई गिला नहीं कि कोई जानता नहीं अब तो मेरा नसीब भी पहचानता नहीं । घनघोर रात पेड़ की परछाइयों का डर मेरे सिवा कोई भी जिसे मानता नहीं । अधखुली सी नींद हो कि धूप की चटख … Continue reading

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तुम्हारी अमानत

ग़ज़ल जो व्यक्त करती है दर्द और इश्क़ को दिल में दर्द बहुत है लेकर थोड़ा मरहम आ जाओ वक़्त नहीं होगा तुम पर तुम जो है वापस ले जाओ । अश्क़ो की जागीर भरी है थोड़े मोती हैं बाकी … Continue reading

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न जाने कहाँ को चले जा रहे हैं ।

भरी है दुपहरी बहे जा रहे हैं न जाने कहाँ को चले जा रहे हैं । चले जा रहे हैं । खड़े पीठ करके भले उस तरफ हों मगर मंजिलों को तके जा रहे हैं। चले जा रहे हैं । … Continue reading

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तंज़….

कभी दरिया कभी सागर से लगते हैं नैन पतझड़ से जब बरसते हैं । चश्म सजते हैं गुलाबी होकर तुमको बेरंग बना बैठे हैं । रात आई है कितनी बन ठन के चराग़ बिन जले ही जलते हैं । अलाव, … Continue reading

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बंदगी: तुम्हारे नाम की

बड़ा आसां है कहना बेवफा कहना नहीं लेकिन बंदगी की हो कैसी भी मगर सर तो झुकाया है ॥ लगी है आज भी तुमसे छुपा कर रखी है लेकिन तुम्हे तो है पता सब कुछ कि तुमसे क्या छुपाया है … Continue reading

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सुनो तो

काली घनेरी बूँद से पूछो क्यों रो दिए इंसान हर तरफ मिला इंसान खो दिए । मंदिर हो या मस्जिद कहीं कलीसा सभी जगह वो तू ही था हर उस जगह, जिसको नज़र किये । ऐसा लगे क्यों तुझमे नहीं … Continue reading

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“तो क्या हो ……………”

तेरे पहलू में सर छुपा ले तो क्या हो इस जहाँ को शमशान बना दे तो क्या हो जी नहीं सकते इक पल भी तुम बिन तुझे इस जहाँ से चुरा ले तो क्या हो दामन-ए-वक़्त में है तेरा मिलना वक़्त … Continue reading

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काश…

मुहब्बत में जलाकर आज भी रखे दिये हमने कभी तू लौटकर देखे अँधेरा न मिले घर में॥ ख़ुशी मिलती है, तेरी शोहबतें हासिल नहीं मगर तेरी यादों के हाथो सौंप दी ये ज़िन्दगी हमने ॥ छुपा के रखे है हमने … Continue reading

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तन्हा राहें और तुम

उन्ही राहों पर हम तन्हा चले हैं कदम के निशाँ तेरे मेरे पड़े हैं ॥ वही रंग हैं और वही रूप भी है मगर पेड़ नज़रें झुकाए खड़े है ॥ बुलाया हमें उस गहरी नदी ने जिसके किनारे सूने बड़े है … Continue reading

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तुम …

भुला दिए वो हमें यूँ किसी कसम की तरह हमारे दिल में समाएँ हैं जो बचपन की तरह॥ वही ख्याल वही गम वही है शोख समां ये राज़ तेरी मुहब्बत का है शबनम की तरह॥ लटें जो हिलती हुयी काँधों … Continue reading

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