Category Archives: जीवन तरंग

हम लोग !

हम लोग रोते, चीखते, लड़ते. पिटते और हँसते धूल आँधी पानी और तूफ़ान सब बेकार हम हमेशा अपने में मगन कभी यहाँ कभी वहां जाने कहाँ बसंत, सर्दी, गर्मी या बरसात चिकने घड़े से हम कभी लड़े फिर उठे और … Continue reading

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पुष्प, दीप्ति – एक नया संसार

सोचा था क्या बनेंगे हम बने दीप्ति या बने सुमन दीप्ति बने तो जलन साथ में सुमन बने तो मिले चुभन सोचा था क्या बनेंगे हम दीपक बनकर आग लगा दे इस दुनिया को खाक बना दे जी भर साथ … Continue reading

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केवल शब्द

शब्दों को कविता बनते हमने देखा अक्षर में खुद को गिरते हमने देखा बनने को सौ यार यहाँ बन जाते हैं अपनों को बेगाना बनते हमने देखा तस्वीरों में गर झांकोगे रो जाओगे फिर अपने उस बचपन में तुम खो … Continue reading

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