Category Archives: जीवन तरंग

चुनौती या मंज़िले

चुनौती यहाँ है यहीं मंजिले भी यहाँ के सिवा अब कहा जाऊंगा मैं॥ संवरते संवरते जो किस्मत भी बदली अभी तक चला हूँ चला जाऊंगा मैं ॥ कभी साथ छूटे तो थमना भले हो हिफाज़त में हमको उतरना भले हो … Continue reading

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कोई गिला नहीं

कोई गिला नहीं कोई गिला नहीं कि कोई जानता नहीं अब तो मेरा नसीब भी पहचानता नहीं । घनघोर रात पेड़ की परछाइयों का डर मेरे सिवा कोई भी जिसे मानता नहीं । अधखुली सी नींद हो कि धूप की चटख … Continue reading

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Posted in ग़ज़ल, जीवन तरंग, दुःख | 12 Comments

बिन खवाब क्या जीना

ये भी कोई जीना है। ये जीना क्या जीना है ये भी कोई जीना है हर पल सांसे गिनना है हर सांस में आंसू पीना है ये भी कोई जीना है। खोये खवाबों में है लेकिन क्या खवाबों का हमको … Continue reading

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Posted in जीवन तरंग, दुःख, श्रृंगार/प्रेम | Tagged , , , , | 2 Comments

ऐ दोस्त…तुम ऐसे तो न थे

क्या हुआ? ऐ  दोस्त… जब से तुमको जाना है, तुम ऐसे न थे । यूँ कैसे बिखर गए, तुम ऐसे न थे । देखा गम से हमेशा दूर, तुम ऐसे न थे । चेहरे पर भोलापन आँखों में चंचलता न … Continue reading

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जीवन क्या है…..

जीवन क्या है जीवन क्या है ओस की बूँदें बूंदों जैसी रंग बिरंगी रंग हों जैसे इंद्रधनुष के तृष्णा इसकी पुष्पक सुगंध सी शीतल मद्धम पावन ज्योति पावन जैसे धूप दिया हो मधु प्रसाद सा दिया गया हो जीवन क्या … Continue reading

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चलन ज़िन्दगी का

पहिया बताता है चलन ज़िन्दगी का गड्ढों भरी कंकड़ी, पथरीली, साधारण और शानदार ऊंची नीची मखमली घाटियाँ फूलों से भरी सीखता है तमन्नाओं पर काबू करना न बहकना न थिरकना न ही धधकना चड़ता है कोमल राहों पर और टूटे … Continue reading

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कारण

दर्द नहीं है कोई मौका किसी को युहीं जो मिल जाये फूल नदी या हवा का झोंका बस युहीं जो चल जाये फूलों के बिस्तर वाले इसकी कीमत क्या जानेंगे दर्द उसी को मिलता है जो मरते मरते भी जी … Continue reading

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सुनो तो

काली घनेरी बूँद से पूछो क्यों रो दिए इंसान हर तरफ मिला इंसान खो दिए । मंदिर हो या मस्जिद कहीं कलीसा सभी जगह वो तू ही था हर उस जगह, जिसको नज़र किये । ऐसा लगे क्यों तुझमे नहीं … Continue reading

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Posted in ग़ज़ल, जीवन तरंग, दुःख, भक्ति | 6 Comments

भीख या माध्यम

ज़िन्दगी मांगती है भीख हर रोज़ खुशियों अरमानो सम्बन्धों पैसो की भी पर सच में पैसो की किसी को जरूरत है क्या …..शायद नहीं ये तो बस माध्यम है बाकी सब पाने का जीत जाने का हार जाने का किसी … Continue reading

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मृगमरीचिका

रेगिस्तान की सांद्र उमस में भटके पथिक सा मन कभी यहाँ कभी वहां लक्ष्य के पीछे भागता हर क्षण प्रतिक्षण सामने, बस एक कदम दूर तत्क्षण ही अदृश्य समय की गति सा आगम और निगम ….. रेगिस्तान की झुलसती बारिश … Continue reading

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