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कोई गिला नहीं

कोई गिला नहीं कोई गिला नहीं कि कोई जानता नहीं अब तो मेरा नसीब भी पहचानता नहीं । घनघोर रात पेड़ की परछाइयों का डर मेरे सिवा कोई भी जिसे मानता नहीं । अधखुली सी नींद हो कि धूप की चटख … Continue reading

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Posted in ग़ज़ल, जीवन तरंग, दुःख | 12 Comments