Monthly Archives: January 2017

बिन खवाब क्या जीना

ये भी कोई जीना है। ये जीना क्या जीना है ये भी कोई जीना है हर पल सांसे गिनना है हर सांस में आंसू पीना है ये भी कोई जीना है। खोये खवाबों में है लेकिन क्या खवाबों का हमको … Continue reading

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Posted in जीवन तरंग, दुःख, श्रृंगार/प्रेम | Tagged , , , , | 2 Comments

तुम्हारी अमानत

ग़ज़ल जो व्यक्त करती है दर्द और इश्क़ को दिल में दर्द बहुत है लेकर थोड़ा मरहम आ जाओ वक़्त नहीं होगा तुम पर तुम जो है वापस ले जाओ । अश्क़ो की जागीर भरी है थोड़े मोती हैं बाकी … Continue reading

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Posted in ग़ज़ल, दुःख, श्रृंगार/प्रेम | 4 Comments