सुनो तो

काली घनेरी बूँद से पूछो क्यों रो दिए
इंसान हर तरफ मिला इंसान खो दिए ।

मंदिर हो या मस्जिद कहीं कलीसा सभी जगह
वो तू ही था हर उस जगह, जिसको नज़र किये ।

ऐसा लगे क्यों तुझमे नहीं है कोई रहम
या फिर गुनाह कर दिए अल्लाह जो कहे ।

मजहब नहीं सिखाता है गर आपस में रखना बैर
फिर क्यों उसी के नाम पर इतने कतल किये ।

क्या माँ के नाम से बड़ा दुनिया में है मजहब
वो कौन सी आयत थी कि जो माँ ही ले गए ।
(http://navbharattimes.indiatimes.com/world/asian-countries/twin-allegedly-killed-mother-after-being-stopped-from-joining-isis/articleshow/53080931.cms)

तुझको जरा भी है लगी इस कायनात सी
इंसानियत तू ही पढ़ा या कर फ़ना उन्हें ।

है इल्तिज़ा नहीं मेरी हर दिल की है दुआ
तेरी राज़ा का आसरा है आज भी हमें ।

दरिया ख़ुलूस की बहा नहीं तो सुनेगा फिर
इंसान हर तरफ मिला इंसान खो दिए ।

====== ६ जुलाई २०१६ को लिखित

Share
This entry was posted in ग़ज़ल, जीवन तरंग, दुःख, भक्ति. Bookmark the permalink.

6 Responses to सुनो तो

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-07-2016) को  “आया है चौमास” (चर्चा अंक-2398)     पर भी होगी। 

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      बहुत बहुत धन्यवाद महोदय आपका

  2. सच लिखा है पुष्पेंद्र जी ,जितना खून खराबा, अत्याचार धर्म के नाम पर हुआ है उतना अन्य कारण से नहीं हुआ। वेहतरीन रचना मुझे बहुत पसंद आयी।

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      Thanks Mr. Manish. For your excellent timing of acceptance of my request and comment upon.

      Thanks again.

  3. Tarun says:

    bahut khoob!!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *