मृगमरीचिका

रेगिस्तान की सांद्र उमस में
भटके पथिक सा मन
कभी यहाँ कभी वहां
लक्ष्य के पीछे भागता
हर क्षण प्रतिक्षण
सामने, बस एक कदम दूर
तत्क्षण ही अदृश्य
समय की गति सा
आगम और निगम …..

रेगिस्तान की झुलसती बारिश में
भीगता तड़पता मेरा मन
हर क्षण आतुर
जल के लिए
सामने है नज़र
सम्मुख आए तो मिली
मृगतृष्णा,
व्याकुल, विह्वल और कोमल
दौड़ता भागता मेरा मन …..

रेगिस्तान की तड़पती आंधियों में
मोर पपीहे सा चीखता मन
तड़प बस एक बूँद की
चाह झलक की
पुकार एक चाह की
शोले की दहक में
शबनम की चाह
जीवन की राह में
मृत्यु का आलिंगन
रेगिस्तान की सांद्र उमस में
दौडता भागता मेरा मन…..
मेरा मन

Share
This entry was posted in जीवन तरंग. Bookmark the permalink.

16 Responses to मृगमरीचिका

  1. ahmad reza Khan says:

    Bhaut khub sir.

  2. रचना में अंतरतम को निचोड़ कर ही रख दिया है पुष्पेंद्र जी, संवेदना से भरी एक लाजवाब रचना। बहुत पसंद आयी मुझे।

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      आभार मनीष जी… बस आप जैसे सहयोगियों का स्नेह है और माँ शारदा का आशीर्वाद… अन्यथा हम क्या एवं लेखनी क्या.

  3. Atul pandey says:

    Very nice thought sir

  4. Pammi singh says:

    Sunder sabdo aur bhavo ka mishran..
    Badhiya:)

  5. Yashoda says:

    भाई पुष्पेन्द्र जी
    शुभ प्रभात..
    अच्छा लिखते हैं आप
    गूगल ब्लॉग में तो छा जाते आप
    वर्ड प्रेस मे आवा-जाही कम होती है
    सादर

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      आपका बहुत बहुत आभार यशोदा जी इतने मधुमिश्रित शब्दों के लिए.. बस आशीर्वाद और साथ है आप लोगों का।

      फॉलो बटन आज ही संलग्न कर दिया जायेगा ।

      ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद.॥

  6. Yashoda says:

    वैसे कल के अंक में आपकी ये रचना आरही है
    आइएगा …
    और हाँ…ब्लॉग फॉलो करना मत भूलिएगा
    आपके इस ब्लॉाग में फॉलो करने का ऑप्शन नहीं दिख रहा है
    सादर

  7. madhulika says:

    बहुत अच्छा लिखा हैं आपने बहुत सुंदर भावों में डूबो दिया कलम को ।

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      आपका बहुत बहुत आभार अनुपम शब्दों में प्रशंसा के लिए ॥

  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (21-06-2016) को “योग भगाए रोग” (चर्चा अंक-2380)) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

  9. Vivek says:

    वाह !! Behtreen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *