भीख या माध्यम

ज़िन्दगी मांगती है भीख
हर रोज़
खुशियों अरमानो सम्बन्धों
पैसो की भी
पर सच में पैसो की किसी को जरूरत है क्या
…..शायद नहीं
ये तो बस माध्यम है बाकी सब पाने का

जीत जाने का हार जाने का
किसी को पाने का
खुद के टूट जाने का
फरेब और प्यार
विश्वास और घात
इसके कारण नहीं होते
ये तो बस माध्यम ही है

कीमत किसकी है ये पूछो उससे
जो उदास है
किसी के बिछड़ जाने से
कुछ खो जाने से,
क्या पैसा ला सकता है
या उससे जिसे हासिल है हर ख़ुशी
अपनत्व, प्यार और मित्रता की
छोड़ सकता है वो सब कुछ
कुछ और पैसो के लिए
नहीं न,,, क्यों
क्योंकि ख़ुशी पैसे नहीं देते
ये तो बस माध्यम है

ख़ुशी मिलती है

अपनों को मानाने से
बिछड़ो को मिलाने से
डूंबों को बचाने से
भूखो को रोटी खिलाने से
हाँ इसके लिए चाहिए पैसा
ढेर सारा पैसा
अमीरी दिखाने को नहीं
खुशियां बांटने के लिए
क्योंकि
यही तो माध्यम है

अंधेरों में दिया जलाने का
सूखे होंठो पर मुस्कान लाने का
एक घर बसने का
बस एक माध्यम
और कुछ नहीं..
सिर्फ माध्यम

========= लिखित १५ अप्रैल २०१६

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10 Responses to भीख या माध्यम

  1. आपकी लिखी रचना “पांच लिंकों का आनन्द में” रविवार 26 जून 2016 को लिंक की जाएगी …. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ….धन्यवाद!

  2. बेहतरीन..
    सादर

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      धन्यवाद दी… सदैव आपके आशीर्वाद एवं शुभेक्षु

  3. ये माध्यम बन कर ही आज बहुत ही महत्वपूर्ण कारक हो गया है पैसा। एक वेहतरीन रचना । मुझे अच्छी लगी।

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      जी कारक तो हो ही गया है पर जरूरत है इसे माध्यम समझने की नाकि कारण …..

      धन्ववाद.

  4. Vivek says:

    वाह !! बहुत सुंदर रचना .

  5. Vivek says:

    माध्यम – बचपन में जब गावों में बर्फ बाला, सब्जी बाला अपने सामान के बदले अनाज ले जाता था तब अनाज़ एक माद्यम था और आज पैसा एक माद्द्यम है

  6. Chandra Shaikher says:

    Bahut khob kha h man ko chhu Lena wala

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