प्यार: जवाब या सवाल…

अच्छा हुआ जो कोई जवाब ना दिया
रुसवा जो हो मुहब्बत वो लम्हात ना दिया ।

कोई तो दाग लगता दमन में प्यार के
इस डर से उस सवाल से मुंह ही चुरा लिया ।

कोई तो हूक होगी मेरे हुक़ूक़ की
दिल की जुबाँ पे आपने मेरा नाम जो लिखा ।

रोया था मैँ भी साथ में तेरे बजूद के
आंसू की हर चुभन को हंसकर दबाया दिया ।

मन की हर इक दरार बुलाती है हर दफा
मजबूरियों के डर से जिसको छुपा लिया ।

तेरी वफ़ा पे हर जगह हमको यकीन है
बस तू कभी न सोचना हमने भुला दिया ।

देंगे तुम्हारा साथ तो हम हर जनम जनम
साथी हो तुम ख़ुदा ने ही हमको मिलाया था ।

कोई जवाब हो न हो लफ्ज़ो की छाव में
साँसो की लरज़ में दीदार-ए-यार हो गया ।

शिकवा करें तो क्यों महबूब से मेरे
रुसवाइयाँ कहाँ से हो जब प्यार हो गया ।

अच्छ हुआ जो कोई…
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Written on 27 March 2017

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10 Responses to प्यार: जवाब या सवाल…

  1. Dharm Dev says:

    अच्छा हुआ जो कोई जवाब ना दिया………

  2. Rakesh Kumar Gour says:

    wow sir kya baat hai

  3. जबरदस्त सर

  4. Rajesh Kumar says:

    बहुत खूबसूरत गज़ल है । अच्छा लगा ।
    दिल से निकली आवाज, दिल में उतर गई
    उड़ी जो फ़िजा में तो खुशबू बिखर गई ।
    ‘आहट’

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      Bahut khoob Rajesh bhai…. Aapne to nayee line de di likhane ke liye…

  5. aradhana says:

    खुबसूरत दिल कि बात दिल से निकली है पुष्पेन्द्र जी

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      धन्यवाद आरधना जी… सही कहा आपने

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