तेरे नैन मेरे बैन …

तेरे नयनो की धवल शांति में
डूबता तैरता मेरा मन
कभी तिनके का सहारा
कभी स्वयं जलधारा
नयनो के सहारे हृदय की दहलीज़ पर
दस्तक देता मेरा मन
जाने कब से तेरी भावना के सागर में उफान के इंतज़ार में
खड़ा हुआ
शांत मगर तूफ़ान से भरा हुआ …
इसे अभी भी विश्वास है शायद
कभी तो पत्थर की शिला पर
घड़े के निशान पड़ेंगे
कभी तो तेरे मन के तार झंकृत होंगे
पर ये विश्वास डगमगाता भी है
साहस छूटता है
पर मेरा मन
फिर नए विश्वास से उठता है
फिर तेरी पलकों के गुलाबी दर को
दूर से चूमता है
इस डर से
की कहीं तेरी नींद न टूट जाये
पर इस आशा से की शायद
इस बार तेरे हृदय के द्वार खुल जाये
और मेरी दुनिया सितारों से भर जाये
मगर शायद तेरी दुनिया में मेरे लिए
जगह ही नहीं है
फिर भी मेरा मन ………
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Written on 5 Feb 2003

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14 Responses to तेरे नैन मेरे बैन …

  1. Dharm Dev says:

    डूबता तैरता मेरा मन….
    Really heart touching Lines

  2. बहुत ही मार्मिक रचना है। मन के कोमल भावों को अभिव्यक्ति करती वेहतरीन रचना।

  3. Rakesh Kumar Gour says:

    Sir ji it’s good one i love it please make always

  4. अतिसुन्दर सर

  5. Vivek says:

    वेहतरीन रचना

  6. Mohit says:

    AtI uttam

  7. Rohit says:

    Shandar hai.

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