तुम्हारी अमानत

broken-heart

ग़ज़ल जो व्यक्त करती है दर्द और इश्क़ को

दिल में दर्द बहुत है लेकर थोड़ा मरहम आ जाओ
वक़्त नहीं होगा तुम पर तुम जो है वापस ले जाओ ।

अश्क़ो की जागीर भरी है थोड़े मोती हैं बाकी
छोटा सा झोला भर लो और बाकी फेक चली जाओ।

फूल सभी मुरझाए हैं पर थोड़ी खुशबू तो है ही
हाथों को रंग लो चाहे, यादों की हवा उड़ा जाओ।

जश्न मुकाबिल क्या होगा जो आँखों से पी थी हमने
थोड़ी अब तक बची हुई है आखिरी जाम लगा जाओ।

थोड़ी साँसे बची हुई हैं दूर अँगीठी पर रक्खी
यही अमानत फ़ाज़िल सबसे जो चाहो तो ले जाओ।

कसते हैं फिकरे जो हम पर इश्क़ हमारा का क्या जाने
कुछ बदनाम हुए हम हैं, कुछ तुम हमें बना जाओ।

रश्क़ न करना हामिद हैं हम, रहम खुदा का है ज़ाहिर (प्रशंसक)
शाद तहों में छुपी हुई है चीर लो दिल को ले जाओ। (ख़ुशी)

इश्क़ हमारा वफ़ा की हद है रुसवा ना होने देंगे
शान वफ़ा की नज़रो से है नज़रें चुरा के ना जाओ।

मान लो हम हैं खुदा की रहमत यही इल्तिज़ा है बाकी
गिर्दाव तेज़ है फँसी सफीना पार लगे या डूबा जाओ॥ (भंवर, नाव)

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२५ नवम्बर २०१६ को लिखित

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4 Responses to तुम्हारी अमानत

  1. Tarun says:

    Superb

  2. rakesh gour says:

    opp kya cahate ho boss

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