तमन्ना…

जिसके लिए जलाए थे सितारे चराग से
पूनम की उस चमक को बादल चुरा लिए ।

झूठे से दो पलों की शिकायत करें तो क्यों
न तुम कभी खफा थे न हम बेवफा हुए ।

शर्मों हया की सुर्खियां खामोशियाँ बनी
ज़ाहिर न इशारा किये नुमायां नहीं किये ।

लूटे थे खुद ही आपकी खुशियां तमाम जो
उनको ही तो पता रहीं कमजोरियां सभी ।

दिल में दबा के दर्द सारी उमर का हम
लब पे सजावटी हँसी चस्पा किये रहे ।

खुद की कशी के दर्द का किससे करें बयाँ
मर मर के साँस आ रही उसके ही नाम से ।

रूठे हुए नसीब से इतनी सी इल्तिजा
लम्हों की एक भूल की माफ़ी दिया करे ।

देना है मौत दे हमें या ज़िन्दगी अता
महबूब के बिना नहीं जीना है अब मुझे।

मुझको यकीन है सनम तेरी वफ़ा पे भी
हमको मिलाएंगी वही अधूरी वो चाहतें।

टूटे हुए वज़ूद के हर तारे को है कसम
इस ज़िन्दगी से हर जनम तुम हो मेरे सनम।

जिसके लिए सजाए थे सितारे चराग से …..

Written on 11/04/2016

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8 Responses to तमन्ना…

  1. Pushpendra Singh Gangwar says:

    Kya hua Bhai…

  2. Tarun says:

    Bahut khoob

  3. Vivek says:

    Good One

    • Pushpendra Singh Gangwar says:

      Thanks a lot bhai. Really thankful for all members and audiens for the wonderful support till yet…

  4. जिसके लिए जलाए थे सितारे चराग से
    पूनम की उस चमक को बादल चुरा लिए … गजब का शेर है ।
    एक वेहतरीन गजल।

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