चुनौती या मंज़िले

Vivekanand

चुनौती यहाँ है यहीं मंजिले भी
यहाँ के सिवा अब कहा जाऊंगा मैं॥
संवरते संवरते जो किस्मत भी बदली
अभी तक चला हूँ चला जाऊंगा मैं ॥

कभी साथ छूटे तो थमना भले हो
हिफाज़त में हमको उतरना भले हो
भले हम हो पंछी या इंसां कोई हम
अभी तक उड़ा हूँ उड़ा जाऊंगा मैं॥

अँधेरा अगर है तो है गलती किसकी
नहीं राह कोई खता बोलो किसकी
नहीं कोई डर, गर है दीपक नज़र में
अभी तक जला हूँ जला जाऊंगा मैं॥

है आवाज़ आती हमेशा तमस से
पुकारे कोई हमको व्याकुल कलश से
नहीं साथ हो कोई दरिया की लहरे
अभी तक बहा हूँ बहा जाऊंगा मैं॥

नहीं रोशनी हो सितारों में लेकिन
सुनायी दे लहरे अभी भी है मुमकिन
बहुत गीत लिखे सुने होंगे तुमने
अभी तक सुना हूँ सुना जाऊंगा मैं॥

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